विभिन्न विनियामक / संविधिक तथा बैंक की आन्तरिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बैंक के निदेशक मण्डल ने दिनांक की बैठक में निम्नांकित “निवेश नीति” का अनुमोदन किया है |
बैंक को ग्राहक के निवेशकर्ता या एजेंट के रुप में कार्य नहीं करना है |
बैंक के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी को सभी प्रकार के निवेश करने के लिए अधिकृत किया गया है | परन्तु, मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी किसी भी निवेश के पूर्व निवेश कमिटी की लिखित अनुमति प्राप्त कर लेंगे |
बैंक के कुल जमा (Total Deposits) का 5% से अधिक किसी एक बैंक में निवेश नहीं होना चाहिए तथा सभी बैंकों को मिलाकर कुल 20% से अधिक नहीं होना चाहिए | DCCB में निवेश को Inter Bank Exposure Limit से छुट दिया गया है |
धनबाद सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव एवं स्टेट को–ऑपरेटिव बैंक , झारखण्ड को छोड़कर हमारा बैंक अन्य किसी सहकारी संस्थान के शेयर में निवेश नहीं करेगा |
Non – SLR Investments की अधिकतम सीमा 31 मार्च 2017 के कुल जमा के 10% तक होगी | कुल जमा=रु. 4001.30 लाख जिसका 10% = 400.13 लाख Non- SLR Investment निम्नांकित में निवेश किया जा सकता है :-
Individual / Group Lending के लिए जो सीमा (Limit) निर्धारित है वही Non–SLR निवेश के लिए भी निर्धारित रहेगी |
सभी Non-SLR निवेश निर्धारित exposure limit (INDIVIDUAL/GROUP) केअन्तर्गत होंगें |
प्रत्येक छमाही अन्तराल में Non–SLR निवेश की समीक्षा को निदेशक मण्डल की बैठक में प्रस्तुत किया जायगा|
Perpetual Debt Investments में निवेश की अनुमति नहीं है
1. हमारी निवेश नीति का मुख्य उद्देश्य है कि सभी स्टैच्यूटरी एवं रेगुलेटरी अनिवार्यता का अनुपालन करते हुए ही सभी प्रकार के निवेश किये जाय | खरीद हेतु सिक्युरिटी का चयन करते समय सिक्युरिटी की उत्पादकता, परिपक्वता तिथि, इत्यादि पर गंभीरता पूर्वक विचार करना चाहिए ताकि बैंक का कोष सुरक्षित भी रहे तथा आय भी अच्छी हो | हमारे बैंक द्वारा RBI बिडिंग में सम्मिलित होने का भी लक्ष्य रखा गया है | प्रतिभूतियाँ RBI के अधिकृत प्राइमरी डीलर से भी खरीदने का निर्णय है |
2. प्राइमरी डीलर्स से प्रतिभूतियाँ खरीदने हेतु कम-से- कम तीन डीलरों से कोटेशन मंगाना चहिये | चयन करने के पश्चात् मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी निवेश कमिटि में प्रस्ताव भेजेंगे तथा अनुमोदन के पश्चात् खरीद कर सकेंगे |
3. बैंक को पुरे साल के अन्तर्गत कुल जितने रुपयों का निवेश करना हो उसमें से 30% का निवेश 10 वर्ष या अधिक समय के लिए, 30% का निवेश 5 वर्ष के लिए एवं शेष राशि को एक से दो वर्ष के लिए निवेश करने का निर्णय लिया गया | Assets-Liabilities में संतुलन बनाये रखने हेतु उपरोक्त खरीद बिक्री के अनुपात में Assets-Liabilities Committee की सलाह से परिवर्त्तन भी किया जा सकता है|
4. G-Sec के किसी भी स्क्रीप्ट को खरीदने के लिए सीमा निर्धारित नहीं है | (No Limit, as per Bank’s Prudence)
5. खरीदे गये सभी सेक्युरिटीज का पूर्ण विवरण बैंक के सिक्युरिटी रजिस्टर में मेन्टेन किया जायेगा तथा इसका सत्यापन Concurrent Auditor के द्वारा प्रति माह कराया जायेगा |
6. प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों को मूलधन से मूलधन के आधार पर दलाल फर्मो या अन्य बिचौलिया कम्पनियों के साथ कोई क्रय/विक्रय नहीं करना चाहिये |
7. बैंक के लिए यह आवश्यक है कि वे अपने सभी निवेश (एस० एल० आर० एवं गैर एस० एल० आर० सहित) को निम्नांकित तीन श्रेणियों के अन्तर्गत वर्गीकरण करें :-
सभी प्राइमरी अर्बन कोआपरेटिव बैंक को अपने NDTL का एक निश्चित प्रतिशत “SLR HOLDINGS” के रूप Statutory Liquidity Ratio मेंनटेन करने हेतु G-Sec, State Government Securities या अन्य Securities जो RBI से SLR हेतु एप्रुव्ड हों-खरीदी जाती हैं |
SLR सिक्यूरिटीज को बैंक तीन तरह से रख सकते हैं :-
अपने बैंक का SGL एकाउन्ट HDFC Bank, Stephen House Branch कलकत्ता में खोला गया है |अपने बैंक की सभी सरकारी प्रतिभूतियाँ उपरोक्त SGL एकाउन्ट में ही रखी गई हैं |
बैंक को अपने समस्त NON-SLR इनवेस्टमेंट एवं Non-Performing इनवेस्टमेंट का पूरा विवरण का बैलेंश शीट के “Notes on Accounts” के ANNEX-III में दिखाना चाहिए |
इंटरनल कंट्रोल, एकाउंटिंग स्टैंडर्डस, गवर्नमेंट सिक्युरिटी में इनवेंस्टमेंट का एकाउंटिंग प्रोसेड्योर, सेटलमेंट डेट एकाउंटिंग इत्यादि के सम्बन्ध में माननीय भारतीय रिजर्ब बैंक के मास्टर परिपत्र में अंकित निर्देशों का अनुपालन होना चाहिए |
उपरोक्त दोनो प्रकार की ओडिट नियमित रूप से कराने एवं उनके प्रतिवेदन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है | Concurrent Auditor को जाँच करके प्रमाण पत्र देना है कि “प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री सम्बन्धी लेन-देन बैंक के लिए लाभप्रद दरों पर किए जाते हैं |”
बैंक के निवेश को निम्नांकित श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाना चाहिए :-
उपरोक्त सभी श्रेणियों के निवेश का मूल्यांकन RBI के दिशा निर्देश के अनुसार करना है |मूल्यांकन को Concurrent Auditors/Internal Auditors से जाँच कराना है |
बैंक को अपने निदेशक मंडल के अनुमोदन से दलालों की सूची बनानी चाहिए | दलालों को सूचीबध्द करने के पूर्व उनका
की जानकारी करने के पश्चात् ही बैंक के बोर्ड के समक्ष सूचीबध्द करने हेतु नाम प्रस्तुत करना चाहिए | Broker कारोबार की सीमा भी तय करनी चाहिए | ऐसा नहीं हो कि एक ही ब्रोकर से सभी खरीद/बिक्री की जाए |
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